अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता हैं आइए जानते हैं।

 जब साल 1917 में रुसी  महिलाओ ने रोटी और और शांति मांग के लिए विरोध प्रदर्शन के साथ किया।  जिसके फलस्वरूप हम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मानते हैं।   इस विरोध प्रदर्शन की वजह से तत्कालीन रूसी जार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। अंतरिम सरकार ने महिलाओं को वोट देने का अधिकार भी दिया।



हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day ) मनाया जाता है। इस दिन महिलाए हँसी ख़ुशी जश्न मानती हैं।  मनाएं भी क्यों न, आज महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं। आज की महिलाएं अपने सपनों की उड़ान भरने में यकीन रखती हैं। हालांकि कई लोगों के मन में इस दिन को लेकर कई तरह के सवाल आते हैं। जैसे क्यों मनाते हैं ये दिन, 8 मार्च को ही क्यों, इस दिन का रंग क्या है, इसकी जरूरत क्या है.. वगैराह । हम आपको बताएंगे इस दिन से जुडी कुछ रोचक बाते। 

1. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस इतना लोक प्रिय क्यों हुआ ?

संयुक्त राज्य अमेरिका में 1909 से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। कुछ समय बाद अमेरिका के लोगों ने इस छुट्टी को मनाना बंद कर दिया। 1920 के दशक में सोवियत संघ और फिर चीन और क्यूबा जैसे कुछ अन्य कम्युनिस्ट देशों ने इस दिन को महिलाओं और विश्व शांति के लिए छुट्टी के रूप में मनाना शुरू किया। तब से छुट्टी दुनिया भर में अधिक से अधिक लोकप्रिय हो गई है।



2. इसका सामाजिक प्रभाव अथवा क्या सुधर हुए ?

कई जगहों पर, इस दिन का कोई राजनीतिक पहलू नहीं होता है, और यह केवल पुरुषों के लिए महिलाओं के लिए अपने प्यार का इजहार करने का समय होता है। यह मदर्स डे और वैलेंटाइन डे के मिश्रण के समान है। पुरुष अपनी माताओं, पत्नियों, प्रेमिकाओं, सहकर्मियों आदि को फूल और छोटे-छोटे उपहार भेंट करते हैं। कुछ देशों में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को मदर्स डे की तरह मनाया जाता है, जहाँ बच्चे अपनी माँ और दादी को छोटे-छोटे उपहार देते हैं। कुछ देशों में महिलाओं को आधे दिन की छुट्टी मिलती है। अक्सर, स्कूलों में एक उत्सव होता है जहाँ छात्र अपने शिक्षकों का सम्मान करेंगे।

जब रूसी महिलाओं ने 'रोटी और शांति' की मांग में हड़ताल की तो चार दिन बाद राजा को पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा और अंतिम सरकार ने महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया। सन 1917 में युद्ध के दौरान हड़ताल तक इसे औपचारिक रूप नहीं दिया गया था। हालांकि हड़ताल 8 मार्च को शुरू हुई और यह वह तारीख बन गई जब अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।



3. इसकी शुरुआत क्यों और कैसे हुई ?

1975 में, संयुक्त राष्ट्र ने भी इस अवकाश को महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता के लिए मान्यता देना शुरू किया। संयुक्त राष्ट्र प्रत्येक वर्ष छुट्टी के लिए एक राजनीतिक या सामाजिक विषय चुनता है। उदाहरण के लिए, 2011 का विषय था ""शिक्षा, प्रशिक्षण और विज्ञान और प्रौद्योगिकी तक समान पहुंच: महिलाओं के लिए सभ्य कार्य का मार्ग।" और 2012 का विषय था "नेतृत्व में महिलाएं: एक COVID-19 दुनिया में एक समान भविष्य प्राप्त करना"। इस तरह, छुट्टी दुनिया भर में महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को देखने का समय है।

4. हमें इस किस नजरिये से देखना चाहिए। 

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक आधिकारिक अवकाश हैं। 
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अब अल्बानिया, अल्जीरिया, आर्मेनिया, अजरबैजान, बेलारूस, बोस्निया और हर्जेगोविना, ब्राजील, बुर्किना फासो, कैमरून, चीन, क्यूबा, ​​इक्वाडोर, जॉर्जिया, इटली, इज़राइल, लाओस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मैसेडोनिया में एक आधिकारिक अवकाश है। मोल्दोवा, मंगोलिया, मोंटेनेग्रो, पोलैंड, रोमानिया, रूस, सर्बिया, ताजिकिस्तान, यूक्रेन, उज्बेकिस्तान और वियतनाम।


8 मार्च के दिन की शुरुआत एक आंदोलन से हुई थी। दरअसल, साल 1908 में 15000 महिलाएं ने कम का घंटे, बेहतर सैलरी और वोट देने के अधिकार की मांग करते हुए न्यूयॉर्क में मार्च निकाला था। जिसके एक साल बाद अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने पहले राष्ट्रीय महिला दिवस की घोषणा की। ये थी क्लारा जेटकिन जो एक कमयूनिस्ट और महिलाओं के अधिकार के लिए वकील भी । क्लारा ने ही अंतर्राष्ट्रीय दिवस के निर्माण का सुझाव दिया था। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पहली बार 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विटजरलैंड में मनाया गया था। वहीं साल 1975 में चीजों को आधिकारिक बना दिया गया जब संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को मनाना शुरू किया।

वैसे तो आज समाज काफी आगे निकल गया है, लेकिन महिलाओं के हक की लड़ाई आज भी जारी है। हालांकि कई महिलाएं ऐसी हैं जो आज भी अपने हक के लिए के लिए लड़ रही है, आज भी कई जगहों पर सम्मान और अधिकार नहीं मिल रहे है। ऐसे में ये दिन महिलाओं के अधिकार, सम्मान दिलाने के लिए समाज को जागरूक करने के लिए इस दिवस को मनाया जाता है।




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